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March 25, 2026

जर्मनी कुशल कर्मचारियों की भारी कमी (Germany Labour Shortage) से जूझ रहा है और इस संकट से निपटने के लिए भारत की ओर देख रहा है। 2022 के समझौते के बाद भारतीयों के लिए जर्मनी में काम करना आसान हुआ है और वीजा कोटा भी बढ़ा है।
नई दिल्ली। जर्मनी इन दिनों कुशल कामगारों (skilled workers) की भारी कमी (Germany Labour Shortage) से जूझ रहा है। बुजुर्ग कर्मचारियों के रिटायर होने और युवा उम्मीदवारों की कमी के कारण, देश के कई उद्योग संकट में हैं। इस ‘डेमोग्राफिक क्राइसिस’ से निपटने के लिए जर्मनी अब तेजी से भारत की ओर रुख कर रहा है।
बर्टेल्समन फाउंडेशन (Bertelsmann Foundation) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी की अर्थव्यवस्था को हर साल 2,88,000 विदेशी कर्मचारियों की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2040 तक जर्मनी की वर्कफोर्स 10% तक कम हो सकती है। जहां जर्मनी में कम जन्म दर एक समस्या है, वहीं भारत में 25 वर्ष से कम आयु के 60 करोड़ लोग हैं, जो एक बड़ा ‘लेबर सरप्लस’ प्रदान करते हैं।
भारत और जर्मनी के बीच 2022 में ‘माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ साइन होने के बाद से भारतीयों के लिए वहां काम करना काफी आसान हो गया है। इसके बाद, 2024 के अंत में जर्मनी ने भारतीय नागरिकों के लिए स्किल्ड वर्क वीजा (Skilled Work Visa) कोटा 20,000 से बढ़ाकर 90,000 प्रति वर्ष कर दिया था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2015 में जर्मनी में जहां केवल 23,320 भारतीय कर्मचारी थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 1,36,670 हो गई थी।
‘इंडिया वर्क्स’ (India Works) और ‘मैजिक बिलियन’ (Magic Billion) जैसी रिक्रूटमेंट एजेंसियां लगातार भारतीय युवाओं को जर्मनी में अप्रेंटिसशिप (जर्मन भाषा में Ausbildung) और नौकरियों के लिए भेज रही हैं। भारत के युवा अब जर्मनी में कसाई (Butchers), बेकर, मैकेनिक, सड़क निर्माता और किंडरगार्टन टीचर जैसे कई क्षेत्रों में अपना करियर बना रहे हैं। अच्छी सैलरी, शानदार लाइफस्टाइल और बेहतर जॉब सिक्योरिटी भारतीयों को अपनी ओर खींच रही है।
स्टेप 1: जर्मन जॉब मार्केट पर रिसर्च करें
जर्मनी की बेरोजगारी दर 6% से कम है और यहां की जॉब मार्केट काफी मजबूत है। सबसे पहले अपनी रुचि के उद्योगों की पहचान करें और जर्मन जॉब वेबसाइट्स, लेबर रिपोर्ट्स तथा नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए वहां की डिमांड को समझें।
स्टेप 2: जर्मन भाषा (German Language) सीखेंभले ही जर्मनी में कई लोग अंग्रेजी बोलते हों, लेकिन जॉब पाने के लिए जर्मन भाषा आनी बहुत जरूरी है। ज्यादातर जर्मन एम्प्लॉयर्स कम से कम B1-लेवल की जर्मन भाषा की मांग करते हैं। इसलिए, नौकरी के लिए अप्लाई करने से 4-5 महीने पहले भाषा सीखना शुरू कर दें।
स्टेप 3: जर्मन-स्टाइल रेज्यूमे और कवर लेटर बनाएं
आपका रेज्यूमे और कवर लेटर सटीक और जर्मन स्टैंडर्ड के अनुसार होना चाहिए। आजकल कंपनियां ATS (एप्लीकेंट ट्रैकिंग सिस्टम) का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए ध्यान रखें कि आपका रेज्यूमे ATS-फ्रेंडली हो। इसे अपनी जॉब प्रोफाइल के हिसाब से कस्टमाइज़ करें।
स्टेप 4: जॉब्स के लिए अप्लाई करना शुरू करें
जर्मनी के प्रमुख जॉब पोर्टल्स जैसे Monster, Indeed, JobMESH और Arbeitsagentur पर खुद को रजिस्टर करें। इसके अलावा, आप लिंक्डइन पर जर्मन रिक्रूटर्स और HR प्रोफेशनल्स से भी सीधा संपर्क कर सकते हैं।
स्टेप 5: इंटरव्यू की तैयारी करें
अगर आपका CV शॉर्टलिस्ट होता है, तो आपको रिमोट (ऑनलाइन) इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। जर्मन इंटरव्यू के संभावित सवालों पर रिसर्च करें और पूरी ईमानदारी व आत्मविश्वास के साथ जवाब दें। अपनी स्किल्स को बढ़ा-चढ़ाकर बताने से बचें।
स्टेप 6: वर्क वीजा के लिए आवेदन करें
ऑफर लेटर मिलने के बाद, अपने नजदीकी जर्मन दूतावास या VFS Global जैसी अधिकृत एजेंसी के जरिए वर्क वीजा के लिए अप्लाई करें। यदि आपके पास ऑफर लेटर नहीं है, तो आप ‘जॉब सीकर वीजा’ के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। यह आपको 1 साल के लिए जर्मनी जाकर नौकरी खोजने की अनुमति देता है। नौकरी मिलने पर इसे वर्क परमिट में बदला जा सकता है।
| टॉप सेक्टर्स/नौकरियां | औसत पैकेज सालाना (€में) |
औसत पैकेज सालाना (₹में)
|
| फाइनेंस और इंश्योरेंस सेवाएं | €90,652 | ₹98 लाख |
| सूचना और संचार (IT/ Telecom) | €83,565 | ₹90 लाख |
| पावर सप्लाई | €82,738 | ₹89 लाख |
| प्रोफेशनल, तकनीकी और वैज्ञानिक सेवाएं | €79,637 | ₹86 लाख |
| माइनिंग | €68,312 | ₹74 लाख |
| मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं | €66,217 | ₹71 लाख |
| एजुकेशन | €63,043 | ₹68 लाख |
| कृषि सेवाएं | €62,235 | ₹67 लाख |
| हाउसिंग और रियल एस्टेट | €61,570 | ₹66 लाख |
| सार्वजनिक सेवाएं (Public Services) | €59,145 | ₹64 लाख |

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